कुरआन क्या है ?

अल्लाह के रसूल सल्ल. की सुन्नत को ज़िन्दा कैसे करें?

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हम में से हर व्यक्ति को अपने जीवन में एक रोल मॉडल (Rool Model) की आवश्यकता होती है जिसे वह अपनी ज़िंदगी के प्रत्येक विभाग में आदर्श बना सके, इबादत करने का मामला हो, या आत्मा की शुद्धि की बात हो, पारिवारिक संबंध की दृढ़ता हो या समाजिस समस्याओं के समाधान का मसला…. हर जगह हमें अपने लिए एक आदर्श की जरूरत होती है।

इसी उद्देश्य के अंतर्गत अल्लाह ने हर युग और हर समुदाय में ग्रन्थों के साथ व्यवहारिक रूप में संदेष्टाओं को भेजा जिनकी अन्तिम श्रेणी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, ताकि लोग इस्लाम को व्यावहारिक जीवन में देख सकें, उनके सामने कोई हो जो इस्लाम का चलता फिरता आदर्श हो, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दुनिया को सर्वश्रेष्ठ आदर्श बनकर दिखा दिया कुरआन यदि सिद्धांत है तो प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का जीवन उसकी छाप है, अल्लाह ने फरमायाः

“तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन में सबसे अच्छा नमूना है हर उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है और अल्लाह को ज़्यादह से ज़्यादह याद करता है।” (सूरः अहज़ाब 21)

मुहम्मद सल्ल0 की जीवनी की एक विशेषता यह है कि आपने जो कुछ कहा सर्वप्रथम करके दिखाया, कोई भी व्यक्ति मुहम्मद सल्ल0 की कथनी और करनी में अन्तर नहीं पा सकता।
मुहम्मद सल्ल0 की पत्नी हज़रत आइशा रज़ि0
से किसी ने आपके आचरण के सम्बन्ध में पूछा तो उन्हों ने उत्तर दिया:

 ” आप सल्ल0 का आचरण स्वयं क़ुरआन था “ (सहीह मुस्लिम)

अर्थात् मुहम्मद सल्ल0 क़ुरआन के चलता फिरता आदर्श थे।

जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आदर्श बनकर सामने न आते हों, आज राजाओं का उल्लेख करना चाहते हों, किसी सुधारक की चर्चा करने का उद्देश्य हो तो आप देखेंगे कि वह एक पहलू से हम सब के लिए नमूना बन कर आते हैं जीवन के दूसरे पहलुओं को देखें तो वह दागदार होंगे या उस में उसकी कोई भूमिका नहीं होगी जबकि प्यारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िंदगी हर दृष्टि से आदर्श है, पत्नी के साथ सुखी जीवन बिताने की बात होती है तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम यहाँ एक आदर्श पति के रूप में सामने आते हैं, लोगों के साथ मआमला करने की बात होती है तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हर व्यक्ति के दिल में जगह बनाए हुए होते हैं, यहाँ तक कि हर मिलने वाला यही सोचता है कि अल्लाह के रसूल मुझे सबसे अधिक चाहते हैं। आपका जीवन हर बादशाह, हर काज़ी, हर नेता, हर व्यापारी, हर मार्गदर्शक और हर रीफार्मर के लिए नमूना है. छोटे बच्चों के साथ आपका मामला होता है तो उन्हें गोद लेते हैं, उन्हें चूमते हैं उन से मनोरंजन करते हैं, और उनके सामने से गुज़रते हैं तो उन्हें सलाम करने में पहल करते हैं। दुश्मनों के साथ आपके मामला को देखें तो आपको आश्चर्य होगा कि इतिहास में आप से बढ़ कर कोई दयालू व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ, जिसे एक दिन और दो दिन नहीं अपितु लगातार 21 साल तक टार्चर किया जाता है, अमानवीय कष्ट पहुंचाया जाता है लेकिन अपने जानी दुश्मनों को भी क्षमा का परवाना प्रदान करते हैं।

हम नबी सल्ल.की बात कर रहे हैं जो हमारी रहबरी के लिए आए, जिन्होंने हमारे मार्गदर्शन के लिए अपना 23 वर्षीय जीवन समर्पित कर दिया, अगर वह न होते तो आज हम पत्थर और मूर्तियों के सामने माथा टेकते होते, हम उस नबी की बात कर रहे हैं जो कल महा-प्रलय का दिन जब हश्र के मैदान में सब लोग एकत्र होंगे,  बड़ी परेशानी की स्थिति में होंगे, कितने पसीने में डूब रहे होंगे,हर व्यक्ति को अपनी पड़ी होगी, ऐसी परेशानी की हालत में भी जानते हैं हमारे नबी क्या फरमा रहे होंगे? आप कह रहे होंगे: या रब उम्मती उम्मती ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत. क्या ऐसा नबी इस योग्य नहीं कि उन्हें नमूना बनाएँ, क्या ऐसे नबी के साथ अनदेखी की जा सकती है? लेकिन अफसोस कि आज हमें अपने नबी से भावनात्मक प्रेम है और बस। जज़बाती प्रेम का कोई फाइदा नहीं होता. आपका आदर्श हमारे जीवन में नहीं रहा. आपके नमूना से हम कोसों दूर होते जा रहे हैं।

हमें सबसे अधिक इस बात की व्यवस्था करनी चाहिए था कि दिन और रात हम अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के अनुसार गज़ारें, हमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत कदम कदम पर मिलती हैं, सोने से पहले की सुन्नत है, नींद से जागने की सुन्नत है, शौचालय में प्रवेश करने से पहले की सुन्नत है, वज़ू की सुन्नत है, स्नान की सुन्नत है, जूता पहनने की सुन्नत है, कपड़े पहनने की सुन्नत है, घर में प्रवेश करने और उस से निकलने की सुन्नत है, मस्जिद में प्रवेश करने की सुन्नत है, अज़ान की सुन्नत है, इक़ामत की सुन्नत है, नमाज़ में सुतरा रखने की सुन्नत है, नफिल नमाज़ों की सुन्नत है, वर्षा के लिए नमाज़ पढ़ने की सुन्नत है, चाँद और सूरज ग्रहण की सुन्नत है, सज्दा सहू की सुन्नत है, सज्दा तिलावत की सुन्नत है, नमाज़े शुक्र की सुन्नत है,  दुआ की सुन्नत है, नमाज़ से पहले की सुन्नत है, और नमाज़ के बाद की सुन्नत है, सुबह  और शाम की सुन्नत है,  लोगों से मुलाकात की सुन्नत है, मजलिस की सुन्नत है, और से उठ कर जाने की सुन्नत है, खाने की सुन्नत है, पीने की सुन्नत है, तात्पर्य यह कि हर जगह नबी सल्ल. की सुन्नतें हैं जो आज हम में से अधिकांश लोगों के जीवन से निकल चुकी हैं, और यह अफसोस की बात है।

पिछले दिनों कुवैत विश्वविद्यालय के साइंस कॉलेज में एक सभा का आयोजन किया गया था जिसका विषय था “हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत को ज़िन्दा कैसे करें ?” मुझे भी इस कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला, वहां पहुंचने के बाद यह देख कर बड़ी खुशी हुई कि अल्लाह के नबी की सुन्नतों पर सम्मिलित एक स्टाल भी लगाया गया है,जिसमें मिस्वास है, इत्र है, अल्लाह के रसूल सल्ल. की सुन्नतों पर सम्मिलित विभिन्नत पुस्तकें हैं जो निःशुल्क वितरण हेतु रखी गई हैं।

इसलिए प्यारे भाइयो और बहिनो! हमें आज इस लेख को पढ़ने के बाद यह प्रतिज्ञा लेना है कि हम अपने नबी की सुन्नत को अपने समाज में जीवित करेंगे, एक व्यापारी अपने व्यवसाय को फैलाने की सम्भवतः  कोशिश करता है तो हम अपने नबी के चाहने वाले…. अपने नबी की मुहब्बत का दम भरने वाले, क्या आपकी सुन्नत को फैलाने और आम करने में भाग नहीं ले सकते? हम अपने हबीब की सुन्नत को समाज में बढ़ावा नहीं दे सकते? इसलिए मेरे पास एक प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य है…. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत को जिंदा करना…. अल्लाह के नबी की सुन्नत को आम करना. सब से पहले स्वयं अपने जीवन में….फिर अपने घर में, अपने दोस्तों में, अपने रिश्तेदारों में….मिलने जुलने वाले लोगों में. सार्वजनिक स्थानों पर…. इसकी विधि बहुत सरल है. इसका तरीका बहुत आसान हैः वह यह कि हम अपने ऊपर यह अनिवार्य कर लें कि यदि हमें अपने नबी से मुहब्बत है तो कम से कम एक दिन के लिए …जी हाँ! केवल एक दिन के लिए हन अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के अनुसार जीवन गुज़ारेंगे। 

तो आइए! हम आपको एक पुस्तक का हवाला देते हैं,पुस्तक  का नाम है “दिन और रात की हजार से अधिक सुन्नतें” यह पुस्तक शैख खालिद अल-हुसैनान की है,दिन और रात की एक हजार सुन्नतों का स्वयं पालन करें, उसे अपने घर में, अपने दोस्तों और परिजनों में आम करें. अल्लाह हम सबको इसकी तौफ़ीक़ दे. आमीन

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