कुरआन क्या है ?

सोशल मीडियाः अपनों से दूरी गैरों से निकटता

बच्चा माँ की मम्ता के लिए परेशान है लेकिन माँ दूसरों से चाटिंग में लगी हुई है। अब बच्चे का सही प्रशिक्षण कैसे होगा।

बच्चा माँ की मम्ता के लिए परेशान है लेकिन माँ दूसरों से चाटिंग में लगी हुई है। अब बच्चे का सही प्रशिक्षण कैसे होगा।

आज सोशल मीडिया ने हमें इतना विचलित कर रखा है कि इसकी वजह से हमारे रिश्ते खराब हो रहे हैं, अधिकार का हनन हो रहा है और परिवार का प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।

हम अपनों से एक तरह की दूरी और गैरों से निकटता और नजदीकी बढ़ाने लगे हैं, घर के लोग जो हमारी बातचीत सुनने के लिए बेताब हैं, कोई दोस्त या क़रीबी हमारे सामने बैठा हुआ है उन से बातें करने की बजाय ऐसे लोगों में संलग्न रहते हैं जिनसे कभी परिचित नहीं। बच्चा माँ की मम्ता के लिए परेशान है लेकिन माँ दूसरों से चाटिंग में लगी हुई है। अब बच्चे का सही प्रशिक्षण कैसे होगा।

इस लत से योग्यता में कमज़ोरी आ रही है, जानकारी में कमी पैदा हो रही है और नई पीढ़ी अपरिपक्वता का शिकार होती जा रही है, क्योंकि इस राक्षस ने अध्ययन के शौक को भी मृत कर दिया है, तात्पर्य यह कि इससे हर क्षेत्र में कमजोरी आ रही है।

सबसे बढ़कर इस्लाम जो रिश्तों की मजबूती और भाईचारा के स्थायित्व पर जोर देता है सोशल मीडिया की वजह से यह आत्मा बुरी तरह दब रही है।
ऐसे हालात में प्यारे नबी का यह प्यारा आदर्श हमारे लिए मार्गदर्शक की हैसियत रखता है:

इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक अंगूठी बनवाई और उसे पहन लिया। फिर आप ने फरमाया:

شَغلَني هذاعَنكُم منذُ اليَومِ إليهِ نَظرةٌ، وإليكُم نَظرةٌ ، ثمَّ رمَى بِهِ

(مسند أحمد: 4/347 إسناده صحيح، السلسلة الصحيحة: 1192)

“दिन भर यह अंगूठी तुमसे संलग्न किए रही, कभी उस पर एक नज़र डालता हूँ तो कभी तुम पर एक नज़र, अंततः आपने उसे निकाल कर रख दिया।”
(मुस्नद अहमद: 4/347 इसकी सनद सही है, अस्सिलसिला अस्सहिहाः1192)

जरा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पवित्र सभा के शिष्टाचार देखें कि हमारे नबी अंगूठी निकाल कर अलग रख देते हैं कि उसने साथियों से विचलित कर दिया लेकिन आज हम अपने मित्रों और रिश्तेदारों को नजरअंदाज कर के सोशल मीडिया के नशे में ऐसे मस्त देखाई देते हैं कि दायें बाएं भी पता नहीं होता।

ज़रा इस बनावटी जींदगी से बाहर निकलिए, प्रकृति की ओर लौटें, पता चलेगा कि रिश्तों की पवित्रता क्या होती है, इसका सम्मान क्या होता है, बरत कर देखिए।

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